इतिहास:- हिन्दू धर्म भारत का सबसे प्राचीन धर्म है वैसे इसके बारे में विद्वानों के अलग अलग मत है वही इतिहासकार इसको कुछ हजार वरषों पुराना बताते है वही भारत कि सिन्धु घाटी सभ्यता में हिन्दू धर्म चिन्ह है हिन्दू धर्म में मातृदेवी कि मूर्ति ,शिव पशुपति और भी देवता कि मुर्तिया पीपल कि पूजा हिन्दू धर्म में मानते है सिन्धु घाटी के लोग स्वय को आर्य बताते है और आर्य कि सभ्यता को वैदिक सभ्यता कहा जाता है
सिद्धांत ;- हिन्दू धर्म एक ही सिद्धान्त से नही बना है इसमें सभी सिद्धान्त को समान श्रध्दा दी जाती है इसमें अनेक मत और संप्रदाय आते है हिन्दू धर्म स्वर्ग और नरक को अस्थाई मानता है हिन्दू धर्म क अनुसार मनुष्य ही ऐसा है जो पाप और पुण्य दोनों को भोग सकता है और मोक्ष प्राप्त कर सकता है इनमे चार संप्रदाय है । हा लेकिन इसमें ईश्वर के नाम अनेक है इस सिधान्त का मानना है कि धर्म कि रक्षा के लिय ईश्वर बार -बार जन्म लेता है और दुसरो को कष्ट देना पाप मानते है हमारी आत्मा अमर अजर है हिन्दू धर्म में सबसे बड़ा मंत्र गायत्री मंत्र है हिन्दू धर्म के अनुसार जीवन को एक चक्र के रूप में माना गया है
हिन्दू धर्म के नियम – हिन्दू धर्म में 10 नियम है यह सुना जाता है ईश्वर ही शक्ति है कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस नियम का पालन नही करता है वह भटका हुआ होता है
1.ईश्वर प्रणिधान -ईश्वर इससे अलग किसी और में आस्था न रखे चाहे आप पर कितना ही दुःख हो अपनी आस्था को बनाये रखे
2.ईश्वर कि पूजा –ईश्वर कि पूजा हमे प्रतिदिन करनी चाहिए ये ध्यान और प्राथना दोनों से कि जा सकती है पूजा को नियमो के अनुसार ही करना चाहिए यह तक कि दुखो में भी पूजा करना न छोड़े
3.व्रत या उपवास –सप्ताह में एक व्रत जरुर रखे श्रावण का महिना बहुत ही शुभ माना जाता है इसमें मास का सेवन नही करना चाहिए वैसे तो सभी दिन श्रेष्ठरस माना जाते है इस महीने लेकिन सोमवार और शनिवार अधिक माना जाता है
4.तीर्थयात्रा या तीर्थस्थान -तीर्थयात्रा को बहुत ही सुभ माना जाता है और पुण्य भी हम सभी को कभी न कभी तीर्थ स्थानों पर जाना चाहिए इससे वैराग्य और कि प्राप्ति होती है
5.दान देना – हमे अपने जीवन दान पुण्य करना चाहिए गरीबो को खाना खिलाना चाहिए कपडे दान करने चाहिए जरुरी नही है कि आप पैसे खाना ही दान करो वेदों में अनेक दानो का जिक्र है जैसे अन्नदान ,विद्यादान,धनदान,अभयदान आदि
6.मकर सक्रांति और कुंभ पर्व मनाना –वैसे तो हम सभी त्योहारों को अच्छे से मनाते है परन्तु मकर सक्रांति को भी हमे अच्छे से मनाना चाहिए इसके बाद कुंभ का उत्सव मनाना चाहिए मकर सक्रांति के दोरान सभी देवता धरती पर घूमते रहते है जब सूर्य धनु राशी से मकर में जाता है तो मकर सक्रांति मनाते है
7.यज्ञ करना –ह्मेअपने घरो में साल में एक यज्ञ जरुर करना चाहिए वेद के अनुसार यज्ञ चार तरह के होते है ब्रह्मायज्ञ,देवयज्ञ,पितृयज्ञ,अतिथि यज्ञ,वैश्वदेव यज्ञ/ यज्ञ करने से घर में बुरी आत्मा नही आती है घर म शांति रहती है
8.सेवा करना –वेदों में लिखा है कि अपनी माता-पिता और गुरु कि सेवा करनी चाहिए उनको दुःख नही देने चाहिए उनकी आज्ञा का पालन करना चाहिए उनका अनादर न करे माता पिता कि सेवा ही सबसे बड़ा पुन्य है सेवा इसमें बच्चो महिलाओ बूढों आदि कि सेवा करना ही पुण्य है
9.संस्कार का पालन करना –हर एक घर में माँ बाप अपने बच्चो को अच्छे से अच्छे संस्कार देते है तो बच्चो को उनके संस्कारो का पालन करना चाहिए कोई भी गलत काम नही करने चाहिए जिससे संस्कारो पर प्रभाव पड़े प्रतिएक हिन्दू को संस्कारो का पालन करना चाहिए चाहे वो छोटे हो या बड़े
10.धर्म प्रचार –हमे अपने धर्म का बारे में कबी भी गलत नही बोलना चहिये हिन्दू धर्म को पढ़कर ही उसका प्रचार और प्रसार करना चाहिए उसको इसका ज्ञान एक से दुसरो को बाटना चाहिए अपने धर्म कि बुराइयाँ न सुने और अपने धर्म को जाने
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