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Hindu Dharma
Monday, 18 July 2022
पीपल
Thursday, 1 October 2020
क्यों लेते है चरणामृत
Sunday, 20 September 2020
अधिक मास में करे ये काम चमक जायेगी आपकी क़िस्मत
- ऐसी मान्यता है कि पीला रंग भगवान विष्णु को अत्यधिक प्रिय है. इसलिए मलमास के इस पूरे महीने के दौरान भगवान विष्णु को पीले रंग की ही वस्तुएं ही चढ़ानी चाहिए. जैसे कि पीले पुष्प, पीले फल, पीले वस्त्र आदि. जिसे बाद में दान कर देना चाहिए.
- भगवान विष्णु को तुलसी अधिक प्रिय होने के कारण पूरे मलमास में गाय के घी के दीपक तुलसी के पेड़ के सामने करना चाहिए. दीपक जलाने के बाद ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ मंत्र का जप करते हुए तुलसी के पेड़ की 11 बार परिक्रमा करनी चाहिए.
- पूरे मलमास के समय ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करने के पश्चात केसर युक्त दूध से भगवान विष्णु का अभिषेक करना चाहिए इसके बाद ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ मंत्र का 11 बार जाप करना चाहिए.
- पूरे मलमास के दौरान पीपल के पेड़ में जल चढ़ाना चाहिए और गाय के घी का दीपक करना चाहिए क्योंकि पीपल के वृक्ष में श्री हरि विष्णु का वास माना जाता है.
- पूरे मलमास की दौरान में रोज सूर्य भगवान को जल चढ़ना चाहिए. जल चढ़ाते समय ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः' का जाप करते हुए भगवान विष्णु का ध्यान करते रहना चाहिए.
- ऐसा कहा गया है कि मलमास की अवधि के अन्तर्गत दक्षिणवर्ती शंख की पूजा करनी चाहिए. ऐसा करने से श्री हरि विष्णु के साथ ही माताश्री लक्ष्मी का भी आशीर्वाद मिलता है.
- मलमास की नवमी तिथि को कन्याओं को भोजन करवाने से भी सर्व मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
इसलिए आता है मलमास
चन्द्रमा 29.5 दिनों में पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरा करता है। चन्द्रमा पृथ्वी की 12 परिक्रमा 354 दिन में पूरी होती है। इसलिये चन्द्र वर्ष कुल 354 दिन का होता है, जो सौर वर्ष से कुल 11 दिन कम होता है। इस प्रकार तीन वर्षों में कुल 33 दिन का अंतर आ जाता है। इसी कमी को तीन वर्षों में कुल 13 महीने मानकर एक महीने का मलमास पड़ता है।
Tuesday, 11 August 2020
जाने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मानाने का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास में अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था.
इस बार पंचांग के अनुसार अष्टमी की तिथि 11 अगस्त यानि आज सुबह 9 बजकर 6 मिनट से आरंभ हो रही है. अष्टमीकी तिथि 12 अगस्त को सुबह 11 बजकर 16 मिनट पर समाप्त हो रही है. 11 अगस्त को भरणी और 12 अगस्त को कृतिका नक्षत्र है. इसके बाद रोहिणी नक्षत्र आता है जो 13 अगस्त को रहेगा. इसीलिए कुछ स्थानों पर इस दिन भी जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है.
इस वर्ष कृष्ण जन्मोत्सव पर बन रहा है एक विशेष योग
इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी पर एक विशेष योग बन रहा है. पंडितों के मतानुसार, उसी दिन कृतिका नक्षत्र लगेगा. यही नहीं, चंद्रमा मेष राशि और सूर्य कर्क राशि में रहेंगे. कृतिका नक्षत्र और राशियों की इस स्थिति से वृद्धि योग बना रहा है. इस तरह बुधवार की रात के बताए गए मुहूर्त में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से दोगुना फल मिलेगा। 12 अगस्त को वृष राशि चंद्रमा कृतिका नक्षत्र के चतुर्थ चरण में होंगे. रोहिणी नक्षत्र के नजदीक चंद्रमा होंगे, इसलिए 12 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाना शुभ रहेगा।
क्या है शुभ मुहूर्त?
जन्माष्टमी के दिन रात को पूजा करने का समय सही होता है. क्योंकि, द्वापर युग में श्रीकृष्ण का अवतार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि में हुआ था. उस समय चंद्र उच्च राशि वृषभ में था. उस दिन बुधवार और रोहिणी नक्षत्र था. भगवान कृष्ण का जन्म आधी रात को ही हुआ था. 12 अगस्त को पूजा का शुभ समय रात 12 बजकर 5 मिनट से लेकर 12 बजकर 47 मिनट तक है. पूजा की अवधि 43 मिनट है.
पूजा की विधि
पूजा से पहले स्नान जरूर करें. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा का विधान है. पूजा करने से पहले भगवान को पंचामृत और गंगाजल से स्नान जरूर से करवाएं. स्नान के बाद भगवान को वस्त्र पहनाएं. ध्यान रहें कि कन्हाजी के वस्त्र नए हो. इसके बाद उनका श्रृंगार करें. भगवान को फिर माखन का भोग लगाएं और कृष्ण आरती गाएं.
Tuesday, 4 August 2020
जाने कैसे नारद के सिद्द किया कि 'नाम ' बड़ा या 'नामी ', "जय श्री राम"
Sunday, 19 July 2020
20 जुलाई 2020 ज्योतिष के अनुसार 20 साल बाद बन रहा है "सोमवती अमावस्या" का संयोग, जाने व्रत कथा और उपाय
अमावस्या तिथि प्रारंभ- 20 जुलाई 12.10 AM से
अमावस्या तिथि प्रारंभ समाप्त- 20 जुलाई 11.02 PM तक
सोमवती अमावस्या से दूर होते हैं अशुभ योग
Saturday, 18 July 2020
अगर घर में है तुलसी का पोधा तो रखे इन विशेष बातों का धयान
हिंदू धर्म के शास्त्रों के अनुसार तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं। तुलसी का पौधा 5 प्रकार का होता है:
1. श्याम तुलसी
2. राम तुलसी
3. विष्णु तुलसी
4. वन तुलसी और
5. नींबू तुलसी।
तुलसी का पत्ता तोड़ने के नियम भी हैं। ऐसा नहीं है कि आप तुलसी जी के पौधे के पास गए और तोड़ दिया पत्ता। तुलसी जी का पौधा पूजन के लिए होता है। अगर देखा जाए तो तुलसी का एक रूप लक्ष्मी का भी है या यूं मानें कि तुलसी जी कोई पौधा नहीं है अपितु तुलसी जी राधा जी का अवतार हैं इसलिए तुलसी जी का पत्ता तोडऩे और घर में तुलसी जी को रखने के नियम हैं।
रविवार, शुक्रवार, एकादशी, अमावस्या, चौदस तिथि, ग्रहण और द्वादशी को तुलसी का पत्ता नहीं तोडऩा चाहिए।
रविवार और एकादशी को तुलसी जी को जल अर्पण नहीं करना चाहिए।
तुलसी का पत्ता कभी भी नाखून से नहीं तोडऩा चाहिए।
तुलसी के पौधे से गिरे हुए पत्तों का प्रयोग औषधि अथवा अन्य क्रियाओं में करना चाहिए या गिरे हुए पत्तों को मिट्टी में दबा देना चाहिए।
बिना किसी विशेष कारण के तुलसी का पत्ता नहीं तोडऩा चाहिए।
तुलसी जी का पत्ता तोड़ने से पूर्व इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए:
‘मातस्तुलसि गोविन्द हृदयानंद कारिणी।
नारायणस्य पूजार्थं चिनोमि त्वां नमोस्तुते