अधिक मास का पवित्र महीना 18 सितंबर, शुक्रवार शुरू हो गया है। शास्त्रों में इस महीने की महिमा के बारे में बताया गया है। माना जाता है कि इस महीने में पूजा-पाठ करने से दस गुणा अधिक फलों की प्राप्ति होती है। अधिक मास को भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। इसलिए ही इस महीने का नाम पुरुषोत्तम मास अथवा मल मास भी कहा जाता है।
इन दिनों में भागवत पुराण का भी विशेष पाठ किया जाता है। आपको बता दें कि पितृपक्ष और मलमास में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। यही वजह है कि इस बार इस बार शुभ मुहूर्त समेत लग्न 123 दिन के बजाय 148 दिन बाद 25 नवंबर से आरंभ होगा। इस दिन 25 तारीख को देवउठनी एकादशी पर श्री हरि निंद्रा से जगेंगे। उसी के साथ मांगलिक कार्य शुरू होंगे।
- ऐसी मान्यता है कि पीला रंग भगवान विष्णु को अत्यधिक प्रिय है. इसलिए मलमास के इस पूरे महीने के दौरान भगवान विष्णु को पीले रंग की ही वस्तुएं ही चढ़ानी चाहिए. जैसे कि पीले पुष्प, पीले फल, पीले वस्त्र आदि. जिसे बाद में दान कर देना चाहिए.
- भगवान विष्णु को तुलसी अधिक प्रिय होने के कारण पूरे मलमास में गाय के घी के दीपक तुलसी के पेड़ के सामने करना चाहिए. दीपक जलाने के बाद ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ मंत्र का जप करते हुए तुलसी के पेड़ की 11 बार परिक्रमा करनी चाहिए.
- पूरे मलमास के समय ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करने के पश्चात केसर युक्त दूध से भगवान विष्णु का अभिषेक करना चाहिए इसके बाद ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ मंत्र का 11 बार जाप करना चाहिए.
- पूरे मलमास के दौरान पीपल के पेड़ में जल चढ़ाना चाहिए और गाय के घी का दीपक करना चाहिए क्योंकि पीपल के वृक्ष में श्री हरि विष्णु का वास माना जाता है.
- पूरे मलमास की दौरान में रोज सूर्य भगवान को जल चढ़ना चाहिए. जल चढ़ाते समय ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः' का जाप करते हुए भगवान विष्णु का ध्यान करते रहना चाहिए.
- ऐसा कहा गया है कि मलमास की अवधि के अन्तर्गत दक्षिणवर्ती शंख की पूजा करनी चाहिए. ऐसा करने से श्री हरि विष्णु के साथ ही माताश्री लक्ष्मी का भी आशीर्वाद मिलता है.
- मलमास की नवमी तिथि को कन्याओं को भोजन करवाने से भी सर्व मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
इसलिए आता है मलमास
चन्द्रमा 29.5 दिनों में पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरा करता है। चन्द्रमा पृथ्वी की 12 परिक्रमा 354 दिन में पूरी होती है। इसलिये चन्द्र वर्ष कुल 354 दिन का होता है, जो सौर वर्ष से कुल 11 दिन कम होता है। इस प्रकार तीन वर्षों में कुल 33 दिन का अंतर आ जाता है। इसी कमी को तीन वर्षों में कुल 13 महीने मानकर एक महीने का मलमास पड़ता है।