Thursday, 21 November 2019

संगीत से चिकित्सा

नियमित रूप से गायत्री मंत्र और मृत्युंजय मंत्र का जाप करने वाली अमरीका की ख्यातनाम म्यूजिक थैरेपिस्ट पैट मोफिट कुक रंजनी ए. सिंह को ध्वनि के चिकित्सकीय महत्व के बारे में बता रही हैं।
 
 
ध्वनि (साउंड)से आप क्या समझती हैं? 
ध्वनि पवित्र है। विश्वभर की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं में ध्वनि को ब्रह्मांड की रचना करने, उसे बनाए रखने और पोषण करने में महत्वपूर्ण माना गया है। यह विश्वास कि कंपन (वाइब्रेशन)सभी दृश्य-अदृश्य चीजों में व्याप्त है, संगीत से चिकित्सा का वैज्ञानिक आधार रहा है। उदाहरण के लिए, ओझा, नील, मेंबो, झनकरी और शमन जैसे लोग काफी समय से संगीत से देसी चिकित्सा करते आए हैं और वे एक तरह से मनोवैज्ञानिक और फिजिशियन हैं। वे ध्वनि का इस्तेमाल भीतरी चेतना जाग्रत करने, दर्द से छुटकारा दिलाने और उत्कर्ष तक पहुंचने के मुख्य साधन के रूप में करते हैं। ध्वनि का प्रभाव प्रकृति, पशु और इंसानों पर समान रूप से होता है। मैं 2011 में पांजाल में आयोजित अतिरात्र यज्ञ के दौरान भारत में थी, जहां लगातार बारह दिनों तक ऋग् और सामवेद के मंत्रों का जाप किया गया था। ऐसे असाधारण माहौल में रहना मेरे लिए काफी ज्ञानवर्धक और स्फूर्तिदायक रहा।
 
 
क्या अमरीका में वेद मंत्रों से चिकित्सा की जाती है?
 
मुझे पूरी तौर पर मालूम नहीं है, लेकिन आध्यात्मिक उत्कर्ष के लिए जरूर वेदोंं का प्रयोग किया जाता है। लोगों का विश्वास है कि वेदों के मंत्रों और संस्कृत श्लोकों में हीलिंग वाइब्रेशंस होते हैं। लोग उनका अर्थ समझें या ना समझें, लेकिन वे उनसे प्रभावित होते हैं और खुद को अच्छा महसूस करते हैं। और यही वजह है कि वैदिक परंपराएं अब भी जीवित हैं।
 
 
 
संगीत से चिकित्सा कैसे संभव है?
 
संगीत चिकित्सा इस सिद्धांत पर आधारित है कि कुछ खास तरह की ताल और लय में मस्तिष्क की क्रियाओं को स्लो डाउन करने की क्षमता होती है और ऐसा करके ये दुख-दर्द या चिंताओं को कम करते हैं। संगीत और मंत्रोच्चार से भीतर कान को काफी शांति मिलती है। भावात्मक, मनोवैज्ञानिक और शारीरिक-तीनों रूपों में। कुछ अस्पतालों में सर्जरी से पहले रोगी को एनेस्थिशिया के लिए मानसिक रूप से तैयार करने के लिए संगीत बजाया जाता है। ऑपरेशन से पहले संगीत सुकून देता है और यह व्यक्ति को आराम देने के लिए है। ऑपरेशन के बाद जोशीला संगीत सुनाया जाता है ताकि रोगी में उत्साह और जोश बना रहे और वह जल्द सामान्य स्थिति में आ जाए। हमने संगीत से चिकित्सा के कुछ अध्ययनों में यह पाया कि जब दीर्घ स्वर और दीर्घ श्वास होती है, तो यह मस्तिष्क के सामनेे के कॉर्टेक्स को एकाग्र होने में मदद करती है, लगभग ध्यान की तरह। इसीलिए, जब हम मंत्रों को सुनते हैं, या तो उनींदा महसूस करते हैं या फिर एकाग्र या सजग। मंत्रोच्चार का अलग-अलग लोगों पर अलग-अलग असर होता है।
 
 
 
आप ध्वनि चिकित्सा का किस तरह प्रयोग करती हैं?
 
मैं उन ध्वनियों का प्रयोग करती हूं, जो थोड़ी भिन्न होती हैं, और सुनने वाले के लिए अपरिचित होती हैं, क्योंकि यह थिंकिंग प्रोसेस का विस्तार करने में मदद करती हैं। मैं दूसरी संस्कृतियों से उपचारात्मक ध्वनियों का प्रयोग करती हूं, क्योंकि उनमें कुछ खास तरह के ध्वनिक तत्व होते हैं। उच्च आवृत्ति की ध्वनियों का प्रयोग, खासकर अनुनासिक, शायद मन को जाग्रत करता है या दर्द से रोगी का ध्यान हटाता है। संगीत का प्रयोग 'कंटेनरÓ प्रभाव पैदा करने के लिए किया जाता है। इससे रोगी को आराम मिलता है और वह सकारात्मक प्रतिक्रिया करता है। उदाहरण के लिए हम उन रोगियों पर ग्रेगरी और वैदिक मंत्रों का प्रयोग करते हैं, जो ऑटिस्टिक हैं अथवा जो अपना ध्यान पूरी तौर पर एकाग्र नहीं (अटेंशन डेफिसिट डिसॉर्डर) कर पाते हैं।  
 
 
 
दूसरी संस्कृति का संगीत समझ में न आने पर भी यह कैसे उपचार कर सकता है?
 
संगीत में ऐसे तत्व हैं, जो विश्व संस्कृति से आए हैं और हम उसका इस्तेमाल बाइनॉरल बीट्स (द्विकर्णी ताल)के साथ करते हैं। बाइनॉरल बीट्स ऑडियोज हैं, जिन्हें आपकी ब्रेनवेव्ज को ट्रेन करने के लिए तैयार किया गया है ताकि वे मानव मस्तिष्क की सर्वाधिक शक्तिशाली आवृत्तियों तक पहुंच सकें। बाइनॉरल बीट्स को एक खास आवृत्ति पर दोनों कानों के पास दो अलग-अलग टोन में बजाया जाता है। चूंकि इनका ब्रेनवेव्ज पर सीधा प्रभाव होता है, वे मूड, व्यवहार, यहां तक कि चेतना (कॉन्शियसनेस)को बदल सकते हैं। प्राचीन समय के देसी लोक कलाकार यह सदियों से कर रहे हैं। घंटियों जैसे साज वे इस्तेमाल करते हैं, उनसे बाइनॉरल बीट्स पैदा होती हैं। मैं मस्तिष्क के दोनों गोलार्ध में समान कॉम्युनिकेशन के लिए तिब्बती घंटियों का इस्तेमाल करती हूं। इससे आप व्यवस्थित होते हैं, सुकून मिलता है और अच्छी नींद आने में मदद मिलती है।   
 
 
 
क्या रैप और पॉप म्यूजिक के आदी खुद को देसी उपचारात्मक संगीत से जोड़ पाते हैं?
 
यहां व्यवहारवादी और मनोवैज्ञानिक अप्रोच अधिक काम करती है। धीरे-धीरे हम आध्यात्मिकता से दूर होते जा रहे हैं, जो व्यक्ति के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखता है, हमारी सेहत की प्राकृतिक समझ (आध्यात्मिक अर्थ में) को अलाइन में रखता है। दूसरी संस्कृति का पवित्र उपचारात्मक संगीत उन लोगों का भी उपचार कर सकता है, जो रैप और पॉप सुनते हुए बड़े हुए हैं।
 
 
 
आप यह कैसे जानती हैं कि खास तरह की टोन या नोट्स अमुक बीमारी में काम करेंगे?
 
मैंने यह चीन, भारत और इंडोनेशिया से सीखा-समझा है। सभी जिस बात पर जोर देते हैं, वह है रिदम; दूसरा, उन सबमें ऐसा कंपोजिशन करने की क्षमता है, जो ब्रेनवेव्स और पल्स रेट को कम कर सकती है। सही संगीत से आप ऑपरेशन के लिए जा रहे व्यक्ति की पल्स रेट 80 से 50 प्रति मिनट तक ला सकते हैं। आराम की इस स्थिति में, उसकी चिंता कम होती है और सारी प्रक्रिया आसान हो जाती है।
 
 
फास्ट म्यूजिक आपको जाग्रत कर देता है। यदि आप तेज लय को ऊंची आवृत्ति वाले साज के साथ मिला देते हैं(सितार, सरोद या गिटार), तो ये वास्तव में ब्रेन सेल्स को एक्साइट करते हैं। सर्जरी करवा कर आने वाला व्यक्ति इस तरह का जोशिला संगीत सुनकर अच्छी प्रतिक्रिया करता है।
 
 
 
हेवी मेटल म्यूजिक के बारे में आप क्या सोचती हैं?
 
यह दोनों तरह से काम करते हैं। मेटल म्यूजिक नर्वस सिस्टम को अशांत कर सकता है, लेकिन साथ ही सुस्त लोगों में जोश भर सकता है। उनके नर्वस सिस्टम को इस तरह का शॉक नॉर्मल कर सकता है। एक अध्ययन में पौधों और सब्जियों की पैदावार में विभिन्न प्रकार के संगीत-शा ीय, रोमांटिक, पॉप, मेटल आदि के प्रभाव को देखा गया। पाया गया कि मेटल म्यूजिक से पौधे तेजी से उगते हैं, क्योंकि इससे शीघ्रता से सेल डिविजन में मदद मिली। अधिकतर लोगों का मानना है कि शा ीय संगीत से पौधे जल्दी उगते हैं, क्योंकि यह सुकून और शांति देने वाला है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 

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