Thursday, 10 October 2019

माँ सृष्टि-देवी के बीज मंत्रो से उपचार!

🌹 *खं*– हार्ट-टैक कभी नही होता है | उच्च रक्तचाप (हाई बी.पी.), निम्न रक्तचाप (लो बी.पी.) कभी नही होता | * ५० माला जप करें, तो लीवर ठीक हो जाता है | १०० माला जप करें तो शनि देवता के ग्रह का प्रभाव चला जाता है |

बीज मंत्रो से उपचार! * कां, * गुं, * शं

🌹 *कां*– पेट सम्बन्धी कोई भी विकार और विशेष रूप से आंतों की सूजन में लाभकारी। 🌹 *गुं*– मलाशय और मूत्र सम्बन्धी रोगों में उपयोगी। 🌹 *शं*– वाणी दोष, स्वप्न दोष, महिलाओं में गर्भाशय सम्बन्धी विकार औेर हर्निया आदि रोगों में उपयोगी ।

बीज मंत्रो से उपचार! * घं, * ढं

🌹 *घं* – काम वासना को नियंत्रित करने वाला और मारण-मोहन-उच्चाटन आदि के दुष्प्रभाव के कारण जनित रोग-विकार को शांत करने में सहायक।🌹 *ढं*– मानसिक शांति देने में सहायक। अप्राकृतिक विपदाओं जैसे मारण, स्तम्भन आदि प्रयोगों से उत्पन्न हुए विकारों में उपयोगी।

बीज मंत्रो से उपचार! * पं, * बं, * यं, * रं

🌹 *पं*– फेफड़ों के रोग जैसे टी.बी., अस्थमा, श्वास रोग आदि के लिए गुणकारी। 🌹 *बं*– शूगर, वमन, कफ, विकार, जोडों के दर्द आदि में सहायक। 🌹 *यं*– बच्चों के चंचल मन के एकाग्र करने में अत्यत सहायक। 🌹 *रं* – उदर विकार, शरीर में पित्त जनित रोग, ज्वर आदि में उपयोगी।


बीज मंत्रो से उपचार! * लं, * मं, * घं, * एं

🌹 *लं*– महिलाओं के अनियमित मासिक धर्म, उनके अनेक गुप्त रोग तथा विशेष रूप से आलस्य को दूर करने में उपयोगी।*🌹मं*– महिलाओं में स्तन सम्बन्धी विकारों में सहायक।*🌹धं* – तनाव से मुक्ति के लिए मानसिक संत्रास दूर करने में उपयोगी ।*🌹ऐं*– वात नाशक, रक्त चाप, रक्त में कोलेस्ट्राॅल, मूर्छा आदि असाध्य रोगों में सहायक।

बीज मंत्रो से उपचार! * द्वान्, * ह्रीं, * एं, * वं, * शुं

*🌹द्वां*– कान के समस्त रोगों में सहायक।*🌹ह्रीं*– कफ विकार जनित रोगों में सहायक।*🌹ऐं*– पित्त जनित रोगों में उपयोगी।*🌹वं*– वात जनित रोगों में उपयोगी।*🌹शुं*– आंतों के विकार तथा पेट संबंधी अनेक रोगों में सहायक ।


बीज मंत्रो से उपचार! * हुं, * अं, *

*🌹हुं*– यह बीज एक प्रबल एन्टीबॉयटिक सिद्ध होता है। गाल ब्लैडर, अपच, लिकोरिया आदि रोगों में उपयोगी।*🌹अं* – पथरी, बच्चों के कमजोर मसाने, पेट की जलन, मानसिक शान्ति आदि में सहायक इस बीज का सतत जप करने से शरीर में शक्ति का संचार उत्पन्न होता है।


सावधानियां...

बीज मंत्रों से अनेक रोगों का निदान सफल है। आवश्यकता केवल अपने अनुकूल प्रभावशाली मंत्र चुनने और उसका शुद्ध उच्चारण करने की है। पौराणिक, वेद, शाबर आदि मंत्रों में बीज मंत्र सर्वाधिक प्रभावशाली सिद्ध होते हैं उठते-बैठते, सोते-जागते उस मंत्र का सतत् शुद्ध उच्चारण करते रहें। आपको चमत्कारिक रुप से अपने अन्दर अन्तर दिखाई देने लगेगा। यह बात सदैव ध्यान रखें कि बीज मंत्रों में उसकी शक्ति का सार उसके अर्थ में नहीं बल्कि उसके विशुद्ध उच्चारण को एक निश्चित लय और ताल से करने में है। बीज मंत्र में सर्वाधिक महत्व उसके बिन्दु में है और यह ज्ञान केवल वैदिक व्याकरण के सघन ज्ञान द्वारा ही संभव है। आप स्वयं देखें कि एक बिन्दु के तीन अलग-2 उच्चारण हैं। गंगा शब्द ‘ङ’ प्रधान है। गन्दा शब्द ‘न’ प्रधान है। गंभीर शब्द ‘म’ प्रधान है। अर्थात इनमें क्रमशः ङ, न और म, का उच्चारण हो रहा है।


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