Sunday, 1 September 2019

गणेश चतुर्थी


गणेश चतुर्थी का दिन विनायक चतुर्थी या विनायक चौथ के नाम से भी जाना जाता है, यह दिन भगवान गणेश को समर्पित है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार यह दिन मंगलमूर्ति और विघ्नहर्ता भगवान गणेश का जन्म दिवस है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह त्योहार भाद्र माह में आता है तथा ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह त्योहार हर वर्ष अगस्त या सितंबर महिने में आता है। यह पर्व गणेश चतुर्थी के दिन से शुरु होकर पूरे दस दिन तक बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है। त्योहार के आखिरी दिन यानि अनंत चतुर्दशी को भगवान गणेश को विदा करते हुए, उनके मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है और अगले वर्ष फिर से आने की मंगलकामना की जाती है।

गणेश चतुर्थी के तथ्य


गणेश चतुर्थी जिसे विनायक चतुर्थी या विनायक चौथ के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दिन को भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रुप में मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह त्योहार भाद्र महिने में मनाया जाता है, यह त्योहार गणेश चतुर्थी से शुरु होकर 10 दिन बाद अनंत चतुर्दशी पर समाप्त होता है।


यह त्योहार भारत के साथ ही नेपाल, मॉरीशस जैसे अन्य कई देशो में भी मनाया जाता है। भारत में  मुख्यतः महाराष्ट्र, गोवा, केरल, तमिलनाडु आदि प्रदेशो में यह त्योहार बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता। वैसे तो इस विषय में कुछ खास ज्ञात नही है कि इस त्योहार की शुरुआत कब और कैसे हुई थी, पर कुछ ऐतिहासिक तथ्यों का विश्लेषण करने से पता चलता है कि महान शासक छत्रपति शिवा जी महाराज के शासन काल में इस त्योहार को काफी महत्व मिला था और इसे हिंदू धर्म तथा संस्कृति के मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक रुप से काफी जोर-शोर के साथ मनाया जाता था।


इसके पश्चात भारत में अंग्रेजी शासन के दौरान सार्वजनिक स्थलों पर त्योहार मनाने को लेकर कई तरह की पाबंदिया लगा दी गई थी। यह वह दौर था जब कई महान स्वतंत्रता सेनानी ब्रिटिश शासन के विरोध में एकजुट थे। यह 1893 का समय था, जब इन्ही महान क्रांतिकारीयों में से एक बाल गंगाधर तिलक ने गणेश चतुर्थी के त्योहार को पुनर्जीवित किया और इसे निजी घरेलु समारोह के जगह एक भव्य सामाजिक तथा सार्वजनिक आयोजन का रुप दिया, जिसने 1857 की क्रांति के बाद एक बार फिर से देश में लोगो के बीच सामाजिक एकता को बढ़ाने का कार्य किया।


गणेश चतुर्थी का महत्व


गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों मे से एक है और पुरे भारत भर में इसे काफी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है और इस त्योहार के दौरान हर तरफ सिर्फ गणपति बप्पा मोरिया का जयकारा सुनने को मिलता है। इस त्योहार की शुरुआत घरो की साफ-सफाई और सजावट के साथ शुरु होती है। एक प्रकार से देखा जाये तो इसकी शुरुआत महीनों पहले से ही शुरु हो जाती है, जिसमें कलाकारों द्वारा प्रतिमाओं का निर्माण किया जाता है और सामान्य लोगो द्वारा घरो तथा पंडालो को सजाने की तैयारी की जाती है।


इस त्योहार को महाराष्ट्र तथा मध्य प्रदेश में काफी भव्य तरीके से मनाया जाता है। यह त्योहार इस लिए भी काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन को भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रुप में मनाया जाता है, जोकि ज्ञान और मंगल कार्यों के देवता हैं। ऐसा माना जाता है कि इस त्योहार पर गणपति स्थापना के साथ भगवान गणेश अपने भक्तों के लिए सौभाग्य लाते हैं और जाते-जाते इन दस दिनो में उनके सभी दुखो और विघ्नों को दूर कर देते हैं।


गणेश चतुर्थी के दौरान होने वाला प्रदूषण

वैसे तो गणेश उत्सव का कार्यक्रम काफी धूम-धाम से मनाया जाता है और इसके आखिरी दिन यानि अनंत चतुर्दशी या जिसे गणपति विसर्जन का दिन भी कहा जाता है, इस दिन पर्यावरण पर होने वाले प्रभाव काफी मायने रखते हैं। इस दिन लोग अपने घरों तथा सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित गणपति का नदियों या समुद्रों में विसर्जन करते है, जो कि पर्यावरण और जलीय जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

इस दस दिन लंम्बे उत्सव के दौरान काफी ज्यादे मात्रा में फूल- मालाएं, प्लास्टिक बैग और प्लास्टर आप पेरिस से बनी मूर्तियां इकठ्ठा हो जाती हैं क्योंकि इन वस्तुओं का विसर्जन सीधे तौर से समुद्रों या नदियों में होता है। इसलिए ये सब चीजे जलीय पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। इनमें से अधिकतर मूर्तियां प्लास्टर आफ पेरिस से बनी होती हैं, जोकि एक अप्राकृतिक पदार्थ है, इसलिए इसे जल में घुलने में महीनों का समय लगता है। इसके अलवा यह मूर्तिंया कई तरह की चीजों जैसे की पेंट और शीशे आदि से सजी होती है, जो कि जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में प्रदूषण की मात्रा को बढ़ाने का कार्य करते हैं।

गणेश चतुर्थी के दौरान प्रदूषण रोकने के उपाय

गणेश चतुर्थी एक उत्सव का पर्व है। यह वह समय है जब लोगो की बीच सिर्फ हर्षोल्लास देखने को मिलता है। यदि हम गणेश चतुर्थी के दौरान कुछ बातों पर अमल करें तो इस त्योहार को ना सिर्फ पर्यावरण बल्कि स्वंय के लिए भी बेहतर बना सकते हैं।

इन्हीं में से कुछ उपायों के विषय में नीचे चर्चा की गयी है, जिन्हें अपनाकर हम इस पर्व को और भी बेहतर तरीके के साथ मना सकेंगे तथा इसके साथ ही पर्यावरण की भी रक्षा कर सकेंगे।

  1. प्लास्टर आफ पेरिस के जगह पर्यावरण के अनुकूल प्राकृतिक पदार्थो जैसे कि मिट्टी या चंदन के लकड़ी से बनी गणपति की मूर्ति को अपनाकर भी हम जलीय जीवन को बचाने में अपना योगदान दे सकते है, क्योंकि यह चीजे पूर्ण रुप से पानी में घुल जाती है।
  2. अगर हम चाहें तो एक ही गणपति प्रतिमा का कई वर्षों तक उपयोग कर सकते है और इसे विसर्जित करने के जगह दूसरी छोटी प्रतिमाओं को विसर्जित कर सकते हैं।
  3. इंको फ्रेडली गणपति प्रतिमा का उपयोग करके। यह ऐसी प्रतिमाएं होती है, जो आसानी से पानी में घुल जाती है तथा इनमें लेड और प्लास्टर आफ पेरिस जैसी वस्तुओं का उपयोग नही किया गया होता है।
  4. ऐसी मूर्तियों को खरीदकर जिनमें कृतिम पेंट के जगह हल्दी तथा अन्य प्राकृतिक रुप से प्राप्त रंगो का उपयोग किया गया हो।
गणपति को लगायै मोदक का भोग

गणेश चतु्र्थी 2 सितंबर को है और आपने गणपति जी को घर में लाने की सारी तैयारियां शुरू कर दी होंगी। लेकिन बप्पा को भोग में वहीं पुराने स्वाद वाला मोदक खिलाने वाली हैं तो एक बार इस तिल से भरे मोदक को घर पर जरूर बनाएं। तो आइए जाने कैसे बनेगा तिल की स्टफिंग वाला मोदक।

    बनाने की विधि
गुड़ को गर्म पानी में डाल दें। इसके बाद तब तक चलाएं जब तक गुड़ पिघल कर गाढा़ न हो जाए। अब इसे छानकर एक तरफ रख लीजिए। 
अब गैस पर एक बर्तन में चावल का आटा लेकर उसमें धीरे-धीरे पानी डालें। जब ये गाढा़ होने लगे तो पानी डालना बंद कर दें। और जब ये हाथों से सहने लायक हो जाए तो इसे गूंथ कर चिकना कर लें।
एक बर्तन में तिल को भून लें। गुड़ के सीरप को गैस में रखकर कुछ देर और गाढ़ा करें और इसमें तिल और घिसा हुआ नारियल डालें। कुछ देर चलाने के बाद मिश्रण गाढ़ा होकर किनारा छो़ड़ देगा। अब गैस से उतार कर इसे किनारे रख दें। 

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मोदक बनाने का तरीका
मोदक बनाने के लिए चावल के गूंथे हुए आटे को हाथ पर लेकर थोड़ा फैलाएं। इसमें बीच में तिल के मिश्रण को छोटे से गोले का आकार देकर भरें और परंपरागत मोदक का आकार दें। भाप वाले बर्तन में इन मोदक को रख कर दस मिनट के लिए भाप में पकाएं। भाप में पकने से मोदक चमकदार हो जाते हैं और देखने में भी सुंदर लगते हैं।  

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